Cag रिपोर्ट से खुली रमन सरकार की वित्तीय अनियमितताओं की पोल !

छत्तीसगढ़

रायपुर/01 दिसंबर 2019। सीएजी रिपोर्ट 2017-18 पर प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि सीएजी रिपोर्ट से रमन सरकार की वित्तीय अनियमितताओं की पोल पट्टी खुली। रमन सरकार की वित्तीय गड़बड़ियों और बिंदुवार प्रहार करते हुये प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि :-

बजट नियंत्रण के लिए प्रमुख आवश्यकता व्यय का नियमित प्रवाह है, पर रमन सरकार ने वर्ष 2017-18 के दौरान 9 विभागों में बजट की अधिकांश राशि अंतिम माह मार्च 2018 में व्यय किया जाना दिखाया है।
अन्य संचार पर पूंजीगत व्यय की शत प्रतिशत राशि मार्च में खर्च करना बताया गया।
इसी प्रकार बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं और 72.23 प्रतिशत राशि मार्च महीने में खर्च करना बताया गया (मार्च में बाढ़ नियंत्रण)।
विधिक सामान्य सेवाएं में 96.57 प्रतिशत राशि अंतिम महीने में खर्च की गई।
कृषि अनुसंधान तथा शिक्षा पर 94.7 राशि केवल मार्च के अंतिम महीने में खर्च बताया गया बिजली परियोजनाओं पर पूंजीगत परिव्यय का 80.83 प्रतिशत राशि का व्यय मार्च के बताया गया जी की रमन सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन को प्रमाणित करता है।
8100 करोड़ के 9ऋण रमन सरकार द्वारा वर्ष 17-18 में खुले बाजार से 8.13 प्रतिशत ब्याज दर पर लिया गया जबकि सरकारी ऋण 7.47 प्रतिशत की दर से मिलता रहा है।
कुल बजट का लगभग 30.55प्रतिशत (91011.85 करोड़ में से 21299.55 करोड़ रुपए) की राशि खर्च ना कर पाना यह साबित करता है कि रमन सरकार योजनाओं को बढ़ा चढ़ाकर प्रदर्शित करती रही केवल कागजी योजनाएं बनती रही जमीनी हकीकत कुछ और थी।
खेल एवं युवा कल्याण विभाग का बजट 71 करोड़ का था जिसमें केवल 18.22 करोड़ की राशि ही खर्च की गई अर्थात 74.5 प्रतिशत राशि खर्च ही नहीं की गई जो रमन सरकार के युवा और बेरोजगार विरोधी चेहरे को उजागर करता है।
पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में भी 57.6प्रतिशत राशि खर्च नहीं की गई।
आदिवासी क्षेत्र उप योजना से संबंधित लोक निर्माण कार्य सड़कें और पुल की 60 प्रतिशत राशि खर्च ही नहीं की जा सकती।
इसी प्रकार लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग में भी 47 करोड़ की राशि खर्च नहीं की जा सकी जबकि प्रदेश में 50 प्रतिशत से अधिक महिलाएं एनीमिया की शिकार रही और बाल कुपोषण के आंकड़े 37 प्रतिशत से ऊपर थे स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल रही सूपेबेड़ा जैसी घटनाएं लगातार सामने आती रही और रमन सरकार स्वास्थ्य के बजट को भी खर्च करने में असफल रही।
इसी प्रकार लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा न्याय प्रशासन खाद्य नागरिक आपूर्ति विभागों में भी बड़ी राशि उपयोग नहीं की जा सकी।
डॉ रमन सिंह के कार्यकाल में वर्ष 2017-18 में किस प्रकार से वित्तीय अनुशासन की धज्जियां उड़ाई गई यह इस तथ्य से भी प्रमाणित होता है कि एक तरफ तो मूल प्रावधान की राशि जो बजट में आवंटित की गई थी वह खर्च नहीं की जा सकी दूसरी ओर अनुपूरक अनुदान में अलग से लगभग हर विभाग में प्रावधान किया गया था जिसका भी 53 प्रतिशत राशि (7640.26 में से 4181.65करोड़) अनावश्यक सिद्ध हुआ।
वर्ष 2017 18 में सार्वजनिक उपक्रमों के कंपनियों को बजटीय सहायता के रूप में 9463 करोड़ 10 कंपनियों को देना बताया गया है सीएजी रिपोर्ट में स्पष्ट आपत्ति इस बात पर है कि सार्वजनिक उपक्रम के कंपनियों द्वारा सरकार को कंपनी अधिनियम के प्रावधान का पूर्ण उल्लंघन करते हुए विगत 4 वर्षों का ऑडिट रिपोर्ट प्रदान नहीं किया गया था उसके बावजूद राज्य और केंद्र सरकार के द्वारा उन्हें बजटीय सहायता प्रदान की गई जो घोर आपत्तिजनक है।
भाजपा सरकार में 2017-18 के दौरान लोक ऋण में 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई और उनमें से 8100 करोड़ के 9 ऋण अधिक ब्याज दर पर खुले बाजार से लिया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *