भाजपा ने कहा : मरकाम पहले बताएँ, कांग्रेस का सेवा दल कहा छुपा बैठा है?

राज्य
रायपुर।(buland khabar) भारतीय जनता पार्टी प्रदेश प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम की टिप्पणी को उनकी राजनीतिक समझ व सोच का दीवालियापन बताते हुए पलटवार किया है।  उपासने ने कहा कि सेवा-समर्पण का कीर्तमान स्थापित कर रहे रास्वसं के बारे में प्रलाप कर रहे वह अशोभनीय कृत्य हैं। संघ के बारे में जानकारियाँ मांगकर चुनौती देने का हास्यास्पद उपक्रम कर रहे कांग्रेस अध्यक्ष मरकाम पहले इस बात का ज़वाब दें कि प्रदेश में कोरोना संकट के चलते जारी लॉकडाउन में फँसे लोगों और प्रवासी मजदूरों की सेवा-सहायता के समय कांग्रेस का सेवा दल  कहा छुपा बैठा है?
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता  उपासने ने कहा कि कोरोना की रोकथाम और सेवा-सहायता के काम में अपनी विफलता के चलते मुँह चुराते कांग्रेस के नेता अब रास्वसं पर ऊलजलूल टिप्पणियां करके प्रदेश की जनता का ध्यान भटकाने की सियासी लफ्फाजियों पर उतर गए हैं। रास्वसं के संबंध में मिथ्या प्रलाप करने और संघ के सरसंचालक से सवाल पूछने से पहले कांग्रेस के नेता और विशेषकर कांग्रेस अध्यक्ष मरकाम अपनी अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से तो यह पूछें कि कांग्रेस के सेवादल कार्यकर्ता आख़िर कहां लापता हो गए हैं? कोरोना संकट की इस घड़ी में लॉकडाउन में फँसे प्रवासी मजदूरों और प्रभावित परिवारों की सहायता करना क्या उनका फ़र्ज नहीं था?
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता  उपासने ने कहा कि दिल्ली, पंजाब, महाराष्ट्र आदि राज्यों की कांग्रेस और उसके गठबंधन की सरकारों ने झूठ बोलकर लॉकडाउन के दौर में प्रवासी मजदूरों को अपने राज्यों से बाहर निकल जाने के लिए उकसाया और संबंधित राज्यों को बताए बिना उन प्रवासी मजदूरों को उनके प्रदेशों की सीमा पर परेशान और प्रताड़ित होने के लिए छोड़ दिया, तब रास्वसं और भाजपा के कार्यकर्ताओं ने ही सेवा-समर्पण की मिसाल पेश की थी। संघ और भाजपा के कार्यकर्ताओं ने लॉकडाउन में प्रभावित परिवारों और प्रवासी मजदूरों के लिए भोजन, राशन, दवा समेत तमाम ज़रूरी सामग्रियों से सहायता की। तब कांग्रेस के लोग राजनीतिक तमाशा खड़ा करने में मशगूल थे। आज उन्हें संघ-परिवार पर टिप्पणी करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता उपासने ने कहा कि संघ और भाजपा के सेवा कार्यों से प्रदेश की कांग्रेस सरकार बुरी तरह घबरा गई थी और उसने आनन-फानन एक शर्मनाक आदेश जारी कर सामाजिक, स्वयंसेवी और सांस्कृतिक आदि संगठनों पर इस बात के लिए रोक लगाई थी कि वे सीधे प्रभावितों तक सहायता नहीं पहुँचाएंगे और सहायता सामग्री सरकार के माध्यम से प्रभावितों तक पहुँचाई जाएगी। इस आदेश के पालन का ज़मीनी सच यह रहा कि सहायता सामग्रियाँ प्रभावितों तक पहुँची नहीं और उसमें भी बंदरबाँट की आशंकाएँ जताई गईँ!  उपासने ने कहा कि रास्वसं के स्वयंसेवकों ने देश के हर संकटकाल में सेवा-कार्यों की जो मिसाल पेश की है, घर-घर शराब पहुँचाने के लिए कोचियागिरी तक पर उतर आए कांग्रेस के लोग तो उसकी कल्पना तक नहीं कर सकते।

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