मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश में बड़े पैमाने पर प्रारंभ हुए रोजगार मूलक काम

छत्तीसगढ़
रायपुर, 23 मई 2020/(बुलंद खबर) मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल के निर्देशों के अनुरूप ग्रामीणों को गांवों में ही रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में बड़े पैमाने पर प्रारंभ किए गए मनरेगा के कार्यों में 26 लाख से अधिक जरूरतमंद मजदूरों को काम मिला है। बघेल ने गांवों में मनरेगा के जाॅब कार्डधारी अधिक से अधिक श्रमिकों को काम उपलब्ध कराने और प्रवासी मजदूरों की घर वापसी और उनकी क्वारेंटाइन अवधि पूरी होने के बाद काम की मांग करने वालोें को तत्काल रोजगार उपलब्ध कराने की तैयारी रखने के निर्देश भी दिए हैं। सभी जिलों में प्रशासन द्वारा मुस्तैदी के साथ इसकी तैयारी की जा रही है।
कोविड-19 के नियंत्रण के लिए लागू देशव्यापी लाॅकडाउन के दौरान छत्तीसगढ़ में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) काफी कारगर साबित हो रही है। मनरेगा में काम करने वाले श्रमिकों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। मनरेगा के जारी प्रतिवेदन के अनुसार छत्तीसगढ़ की 11 हजार 668 ग्राम पंचायतों में से 10 हजार 203 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के 44 हजार 833 कार्य चल रहे हैं, जिनमें 26 लाख 10 हजार 155 श्रमिक काम कर रहे हैं। जिन श्रमिकों को मनरेगा के जाॅब कार्ड जारी किए गए हैं, उनमें से लगभग 79 प्रतिशत मजदूर वर्तमान में कार्यरत है।
मनरेगा के तहत प्रदेश के 12 जिलों रायपुर, बिलासपुर, सरगुजा, कवर्धा, बीजापुर, महासमुन्द, दुर्ग, गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही, राजनांदगांव, मुंगेली और बालोद जिले में 80 प्रतिशत से अधिक जाॅब कार्डधारी मजदूर कार्यरत है। राज्य के 12 जिलों बलौदाबाजार, गरियाबंद, बलरामपुर, बेमेतरा, धमतरी, जशपुर, नारायणपुर, जांजगीर-चांपा, दंतेवाड़ा, कोरिया, सूरजपुर और कांकेर में कार्यरत मजदूरों का प्रतिशत 79 से 60 प्रतिशत के बीच है। इसी प्रकार चार जिलों रायगढ़, कोरबा, कोण्डागांव और बस्तर जिले में कार्यरत जाॅब कार्डधारी मजदूरों का प्रतिशत 51 से 59 प्रतिशत के बीच है।
मनरेगा के माध्यम से लॉक-डाउन के दौर में गांव में ही काम मिलने से श्रमिक राहत महसूस कर रहे हैं। श्रमिकों को समयबद्ध मजदूरी भुगतान ने परिवार के भरण-पोषण की चिंता दूर करने के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति दी है। लाॅकडाउन के दौरान छत्तीसगढ़ में व्यापक पैमाने पर प्रारंभ किए गए मनरेगा के कार्यों से विपरीत परिस्थितियों में श्रमिकों के हाथों में राशि पहुंच रही है, इसने ग्रामीणों को रोजगार की चिंता से मुक्त करने के साथ ही उनकी क्रय-क्षमता भी बढ़ाई है।

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