आलू और सब्जी की खेती से बाबूलाल के परिवार में आई खुशहाली

छत्तीसगढ़

रायपुर, 31 मई 2020/ कृषक अपनी अजीविका के लिए कृषि पर निर्भर रहतेे है लेकिन सिंचाई की सुविधा न होने से वे लाभकारी खेती कर पाने मे असमर्थ रहते हैं। वर्षा आधारित परम्परागत धान की खेती ही अधिकांश कृषकों की नीयति है। मनरेगा के माध्यम से खेतों में कुआं और डबरी बनने से कृषक बारहमासी लाभकारी फसलों की खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं। ‘मनरेगा‘ के माध्यम से गांव-गांव में कराए जा रहे जल संवर्धन के कार्यों विशेषकर किसानों के खेत में सिंचाई कुआं एवं डबरी के निर्माण से खेती-किसानी को संबल मिला है। मनरेगा के अंतर्गत निर्मित कुओं से किसान अब नगदी फसलों की खेती के साथ ही साग-सब्जियों की खेती कर अतिरिक्त आमदनी हासिल करने लगे हैं।

सूरजपुर जिले के ग्राम पंचायत छिन्दिया के कृषक  बाबूलाल के जीवन में भी मनरेगा से बना कुआं खुशहाली लेकर आया है। कुएं से सिंचाई की सुविधा मिल जाने से बाबूलाल अब आलू की खेती के साथ-साथ की खेती करने लगे है। इससे उन्हें हर साल में हजारों रूपए की अतिरिक्त आमदनी हासिल होने लगी है। लॉकडाउन के दौरान भी बाबूलाल अपने खेत में लगी सब्जियों को बेचकर 15 से 20 हजार रूपए की अतिरिक्त आय अर्जित आय की है। बाबूलाल के लिए मनरेगा का कुआं आमदनी का जरिया बन गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *