संतान की लंबी उम्र एवं सुख समृद्धि के लिए महिलाओ में किया माता हलषष्ठी की पूजा- अर्चना

धर्म राज्य
रायपुर बुलंद खबर | छत्तीसगढ़ के पारंपरिक पर्वो में से एक  कमरछठ इस बार 9 अगस्त को मनाया जा रहा है | इस दिन माताएं  अपनी संतान की लंबी उम्र एवं सुख समृद्धि के लिए हलषष्ठी माता की पूजा- अर्चना करती है | अन्य प्रदेशों में हलषष्ठी पर्व को भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलदाऊ के जन्म उत्सव के रूप में मनाने की परंपरा है षष्ठी छठ माता की पूजा अर्चना में पसहर  चावल और छह प्रकार की भाजियो का भोग लगाया जाता है  |

 

बिना हल जोते उगता है पसहर चावल   : 

पसहर चावल को खेतों में उगाया नहीं जाता यह चावल बिना हल जोते अपने आप खेतों की मेड़, तालाब ,पोखर, या अन्य जगहों पर उगता है | भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलदाऊ के जन्मोत्सव वाले दिन हलषष्ठी मनाने जाने के कारण बलदाऊ के शस्त्र हल  को महत्व देने के लिए बिना हल  चलाएं उगने वाले पसहर चावल का पूजा में इस्तेमाल किया जाता है | पूजा के दौरान महिलाएं पसहर चावल को पकाकर भोग लगाती है साथ ही इसी चावल का सेवन कर वह व्रत खोलती है | महुआ, दोना, टोकनी, लाई ,6 प्रकार की भाजी का भी पूजा में महत्व है |

 मान्यता अनुसार माता देवकी ने यह व्रत छह पुत्रों को जब कंस ने मार दिया तब पुत्रों की रक्षा की कामना के लिए माता देवकी ने भादो कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को षष्ठी देवी की आराधना कर व्रत रखा था| इसी मान्यता के चलते महिलाएं अपने पुत्र की खुशहाली के लिए छठ का व्रत रखती है, और अपने बच्चों की लंबी आयु के लिए सगरी में पोतनी डूबा कर 6 बार कमर पर लगाती है|

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