देश का एकमात्र तीर्थ जहां होता है केवल माता का श्राद्ध, जानें इस तीर्थ के बारे में

धर्म
रायपुर । हिन्दू धर्म में मानव जीवन के लिए कुल 16 संस्कारों को बनाया गया है। इन्हीं 16 संस्कारों के सहारे ही मनुष्य अपना जीवन व्यतीत करता है। मनुष्य के लिए बनाए गए ये 16 संस्कार गर्भधारण से शुरू होता हैं और इनका अंत मनुष्य के मरने के बाद होने वाले अंतिम संस्कार से होता है। मृत्यु के बाद भी हमें अपने पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता रहे और हमारा अपने पूर्वजों के प्रति आदरभाव बना रहे इसीलिए हिन्दू धर्मशास्त्रों में पितृ कर्म की व्यवस्था की गई है। इन पितृ कर्म के तहत श्राद्ध, तर्पण आदि कर्म किए जाते हैं।
पूर्वजों के प्रति किए जाने वाले इन पितृ कर्मों को करने के लिए देश के अलग-अलग स्थानों पर पितृ तीर्थ भी बनाए गए हैं। इन पितृ तीर्थों पर पूर्वजों / पितरों की आत्मा की संतुष्टि के लिए पूरे विधि-विधान के साथ श्राद्ध करने का विधान किया गया है। इन्हीं पितृ तीर्थो में से एक पितृ तीर्थ देश के गुजरात राज्य के सिद्धपुर नामक स्थान पर बिंदु सरोवर तट पर बनाया गया है जहां पर केवल माता की श्राद्ध या मातृश्राद्ध करने का विधान है।
ऋग्वेद की ऋचांओं में भी गुजरात के सिद्धपुर का वर्णन किया गया है। यह बिंदु सरोवर गुजरात के अहमदाबाद से करीब 130 किमी. उत्तर दिशा में स्थित है। इस बिंदु सरोवर का उल्लेख रामायण और महाभारत में भी मिलता है।
सिद्धपुर के बिंदु सरोवर तट पर किया था कपिल मुनि ने अपनी माता का श्राद्ध : कहा जाता है कि सांख्य दर्शन के प्रणेता और भगवान विष्णु के अवतार के नाम से जाने, जाने वाले कपिल मुनि का आश्रम सरस्वती नदी के तट पर बिंदु सरोवर पर था। इसी बिंदु सरोवर के तट पर कपिल मुनि ने अपनी माता के मोक्ष की प्राप्ति के लिए कार्तिक महीने में अनुष्ठान किया था।
ऐसा भी कहा जाता है कि परशुराम ने भी अपनी माता का श्राद्ध बिंदु सरोवर के तट पर किया था। इसलिए इस बिंदु सरोवर को मातृ मोक्ष स्थल भी कहा जाता है।

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