कौन है वह जांबाज जिसने सेना को पैंगॉन्ग की चोटियों तक पहुंचाया, जानिए क्या थीं चुनौतियां…

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नई दिल्ली। तीन बार एवरेस्ट फतह कर चुके कर्नल रणबीर सिंह जमवाल ने बीते महीने भारतीय सेना को पैंगॉन्ग इलाके की उन चोटियों तक पहुंचाया है। इस वजह से चीन बौखलाया हुआ है। ब्लैक टॉप, हेलमेट टॉप, गुरंग हिल, मुकाबारी हिल, मगर हिल पर स्ट्रेटेजिक पोजिशन लेने को सेना ने उन्हें डिप्लॉय किया था। करीब 18 हजार फीट की ऊंचाई वाले इन इलाकों तक पहुंचना आसान नहीं था।
क्योंकि, यहां पर खड़ी चढ़ाई, सामने दुश्मन और ऑक्सीजन की कमी है। यही कारण है, भारत और दुनिया के बेस्ट माउंटेनियर्स में शामिल कर्नल रणबीर सिंह जमवाल को इस अहम मिशन के लिए चुना गया। कर्नल रणबीर सिंह जमवाल देश में इकलौते हैं जो दुनिया की 7 सबसे ऊंची चोटियों को छूकर लौटे हैं।
फरवरी महीने में कर्नल रणबीर सिंह जमवाल को लद्दाख के लेह में पोस्टिंग दे दी गई थी। तभी से कर्नल रणबीर सिंह जमवाल लगातार स्पेशल फोर्स के जवानों के साथ इस मुश्किल चढ़ाई की तैयारी कर रहे थे। इस मिशन को उन्होंने अगस्त में अंजाम दिया। जब वह अपनी मिशन के तहत अपनी टीम के साथ थे तो उस वक़्त कड़ाके की ठंड थी। बताया जाता है|
यहां पर रात का तापमान रात माइनस 10 से 15 डिग्री तक चला जाता था। मिशन इतना मुश्किल और चुनौतीपूर्ण इसलिए भी था। क्योंकि, उस जगह तक चुनिंदा जवान ही पहुंच पाए हैं। यही कारण था, जामवाल को उनकी टीम को मात्र 2 ही घंटे सोने को मौका मिलता है। वाकी वक़्त ड्यूटी करनी पड़ रही है।
चीन के सामने होने के कारण भारतीय सेना 24 घंटे इस इलाके में निगरानी रख रही थी। क्योंकि, भारतीय सेना को यह भी डर था कि चीन कभी भी हरकत कर सकता है। 29-30 अगस्त की रात इसी चौकसी के चलते भारत की सैनिक चीन का मुकाबला कर पाए। इसका श्रेय भी कर्नल जमवाल के हिस्से आया है।
इस मिशन के दौरान सेना के पास पीने तक का पानी नहीं था। किसी से इस मिशन पर चुनौती का अंदाजा लगाया जा सकता है। जानकारी के अनुसार, पोर्टर के जरिए बमुश्किल पानी और बाकी सामान पहुंचाया जा रहा है। बीते कुछ दिनों में भारतीय सेना ने पैंगॉन्ग इलाके में स्पांगुर गैप, रीजुंग पास, रेकिंग पास में अपनी पोजीशन को मजबूत किया है। जिसके कारण लद्दाख के इस इलाके में अब हम चीन की हर हरकत पर नजर रख पाएंगे। यही नहीं चीन के अहम मिलिट्री कैम्प भी अब हमारी फायरिंग रेंज में हैं।

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