पंजाब के पूर्व डीजीपी की धरपकड़ में जुटी एसआईटी, कई दिनों से है फरार, जानिए क्या है मामला

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चंडीगढ़ । पंजाब पुलिस की एक एसआईटी ने राज्य के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी से जुड़े 26 सुरक्षाकर्मियों से पूछताछ की है। पिछले कई दिनों से सुमेध सिंह फरार हैं। 1982 बैच के आईपीएस अफसर को जेड प्लस सुरक्षा मिली हुई थी। 1991 में एक युवक के लापता होने के मामले में सुमेध सिंह वांछित हैं।
उन्नतीस साल पुराने आईएएस के बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी के लापता होने के मामले में आरोपी पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। मोहाली कोर्ट ने शनिवार को सैनी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। इसमें 25 सितंबर तक सैनी को गिरफ्तार करके अदालत में पेश करने का आदेश दिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के दौरान कुछ सुरक्षाकर्मियों ने विशेष जांच दल (एसआईटी) के साथ सैनी के बारे में सूचनाएं दी हैं। एक इंस्पेक्टर-रैंक के सुरक्षा अधिकारी ने बयान में जांचकर्ताओं को बताया कि वह 12 से 22 अगस्त तक दिल्ली में उनके निवास पर सुमेध सैनी के साथ रहे। लेकिन सुमेध सैनी ने उन्हें 22 अगस्त को वापस पंजाब भेज दिया था।
एक हेड कांस्टेबल-रैंक के सुरक्षाकर्मी ने एसआईटी को बताया कि उन्होंने 22 अगस्त को सुमेध सैनी को दिल्ली आवास पर पूर्व राज्य पुलिस प्रमुख को देखा था। लेकिन उन्हें भी वापस भेज दिया गया और अब सैनी के चंडीगढ़ निवास पर तैनात किया गया है। एक सहायक उप-निरीक्षक ने एसआईटी को बताया कि वह आखिरी बार 12 अगस्त को सैनी से चंडीगढ़ में उनके निवास पर मिले थे।
पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली में कई स्थानों पर एसआईटी की छापेमारी के बावजूद सुमेध सैनी के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है।
बता दें कि पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के जस्टिस फतेहदीप सिंह ने सैनी की अग्रिम जमानत याचिका और मामले की निष्पक्ष जांच किसी एजेंसी से कराने की मांग संबंधी दोनों याचिकाओं को रद्द कर दिय
00 क्या है मामला :
यह पूरा मामला 1990 दशक का है। उस दौरान सुमेध सिंह सैनी चंडीगढ़ के एसएसपी थे। 1991 में उन पर एक आतंकी हमला हुआ। उस हमले में सैनी की सुरक्षा में तैनात चार पुलिसकर्मी मारे गए थे, जबकि सैनी खुद भी जख्मी हो गए थे। उसी मामले में पुलिस ने सुमेध सैनी के आदेश पर पूर्व आईएएस के बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी को गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने मुल्तानी को हिरासत में रखा और फिर बाद में कहा गया कि वह पुलिस की गिरफ्त से फरार हो गया। परिजनों का आरोप था कि बलवंत सिंह मुल्तानी की पुलिस के टॉर्चर से मौत हो गई. सुमेध सैनी और अन्य पुलिस अफसरों के खिलाफ मोहाली में केस दर्ज किया गया था।

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