सूर्य को धर्म शास्त्रों में जीवन, स्वास्थ्य और आरोग्यता का देवता माना गया है

धर्म
राजधानी रायपुर के हृदय स्थल में स्थित श्री दूधाधारी मठ में कार्तिक शुक्ल अष्टमी को परंपरागत रूप से मनाया जाने वाला सूर्योपासना का पर्व विधिवत रूप से संपन्न हुआ राज्य गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं श्री दूधाधारी मठ पीठाधीश्वर राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज ने सुबह 8:00 बजे मठ मंदिर परिसर में निर्मित प्राचीन कालीन कुएं के पाठ पर विधिवत रूप से सूर्य देवता की पूजा अर्चना की उन्हें पुष्प, जल, चंदन, धूप, दीप प्रदान करके उनकी स्तुति की गई एवं भोग लगा करके प्रसाद उपस्थित भक्तों को वितरित किया गया सूर्य उपासना के संदर्भ में राजेश्री महन्त जी महाराज ने बताया कि सूर्य को यश, कीर्ति और वैभव का द्योतक माना जाता है जो भी साधक या भक्त श्रद्धा भक्ति पूर्वक भगवान सूर्यनारायण की पूजा अर्चना करता है उस पर वह प्रसन्न होकर अपनी कृपा बनाए रखते हैं। साधक को यश, कीर्ति, वैभव के साथ आरोग्यता एवं दीर्घायु प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि अन्नकूट और गोवर्धन पूजा के पश्चात जो प्रथम रविवार आता है उसमें सूर्य देव की पूजा करने की परंपरा श्री दूधाधारी मठ की रही है जिसका निर्वाह हम सब मिलकर करते आ रहे हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि भारतीय सनातन धर्म के सबसे प्राचीनतम ग्रंथ ऋग्वेद में भी सूर्य भगवान को जीवन,स्वास्थ्य एवं आरोग्यता का देवता माना गया है सूर्य की उपासना से अनेक प्रकार की बीमारियों से भी मुक्ति मिलती है ऐसी लोक मान्यता भी है। इस कार्यक्रम में विशेष रुप से श्री दूधाधारी मठ के मुख्तियार राम छवि दास जी, श्री नागा जी महाराज, पुजारी राम प्रिय दास जी, राम अवतार दास जी, राम कीर्ति दास जी, मीडिया प्रभारी निर्मल दास वैष्णव, उमेश गिरी गोस्वामी, जीवराखन वर्मा, कांशी राम साहू, हेमलाल सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित थे

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