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रबी फसलों के लिए बंद पड़ी सिंचाई सेवाएं होगी प्रारंभ

मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि किसानों की लगभग 15 वर्षों से लम्बित सिंचाई कर की बकाया राशि को मिलाकर अक्टूबर, 2018 तक सिंचाई कर की 207 करोड़ रूपए की बकाया राशि भी माफ की जाएगी, जिससे लगभग 15 लाख किसानों को राहत मिलेगी। रबी फसल लेने वाले किसानों को कोई तकलीफ न हो इसलिए हमने रबी फसलों के लिए बंद पड़ी सिंचाई सेवाओं को तत्काल प्रभाव से पुनः प्रारंभ करने का निर्णय भी लिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान के कटोरे के रूप में सम्मान दिलाने वाले अन्नदाताओं का यह हक है कि उन्हें धान का सम्मानजनक दाम मिले। हमने मंत्रि-परिषद् की पहली बैठक में प्रदेश के किसानों से 25 सौ रूपए प्रति क्ंिवटल की दर से धान खरीदने का वादा पूरा किया। केन्द्रीय पूल में चावल खरीदी की मात्रा बढ़ाने का निवेदन भारत सरकार से किया गया है, लेकिन हमारी मांग नामंजूर होने की स्थिति में भी राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारियां निभाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें अहसास है कि किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए हमें स्थाई व्यवस्था करनी पड़ेगी और ऐसी योजनाएं बनानी पड़ेंगी, जिसके दूरगामी परिणाम मिलें। इसलिए गांवांे के विकास के लिए हमने वहां उपलब्ध संसाधनों के ’’वैल्यू एडीशन’’ की नीति अपनाने का संकल्प लिया है और नारा दिया है- ‘‘छŸाीसगढ़ के चार चिन्हारी, नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी, ऐला बचाना हे संगवारी’’। श्री बघेल ने अपने संदेश में कहा कि नालों में बहकर बर्बाद होते पानी को रोकने, पशुधन के संरक्षण एवं संवर्धन, उनसे मिलने वाले उत्पादों के उपयोग, जैविक खाद बनाने, अपर्ने इंधन की व्यवस्था गांव में करने तथा बाड़ी के माध्यम से उद्यानिकी विकास की विस्तृत कार्य योजना बना रहे हैं, जिससे गांवों में स्वावलंबन की नई सुबह होगी। इस क्रम में सभी ग्राम पंचायतों में गायों के आश्रय तथा चारागाह की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। ग्राम सभाओं के माध्यम से इसके लिए जमीन सुरक्षित की जा रही है। इस कार्य में मनरेगा का उपयोग सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इस प्रकार यह केवल नारा नहीं बल्कि गांवों की समृद्धि का सुनिश्चित रास्ता होगा।

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