भाजपा सरकार बिजली कीमतों में बढ़ोतरी वापस ले।

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रायपुर, (buland khabar)13 सितंबर 2025। छत्तीसगढ़ विधानसभा नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि, छत्तीसगढ़ में बिजली की कीमतों में प्रति यूनिट 20 पैसे की बढ़ोतरी ने आम जनता के साथ-साथ राज्य के किसानों की भी कमर तोड़ दी है। इस वृद्धि ने घरेलू उपभोक्ताओं, उद्योगों और सबसे महत्वपूर्ण रूप से,कृषि क्षेत्र को सीधे प्रभावित किया है, जिससे राज्य की आर्थिक और सामाजिक स्थिरता पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। ऊर्जा विभाग स्वयं प्रदेष के मुख्यमंत्री विश्णुदेव साय के पास है। प्रदेष में ऊर्जा विभाग के वर्तमान आकड़े अनुसार एकल बत्ती कनेक्षन 15-लाख 16-हजार 283, कृशि पम्प कनेक्षन 5-लाख 94-हजार 277, एल.टी(घरेलु) कनेक्षन 63-लाख 45-हजार 448, एच.टी(व्यवसायिक) कनेक्षन 3-हजार 8-सौ 99 है। 

 

*समृद्ध संसाधनों के बावजूद मूल्य वृद्धि का कोई ठोस कारण नही..*

 

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि, यह वृद्धि तब हुई है जब छत्तीसगढ़ कोयला और पानी जैसे प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। हम न केवल अपनी बिजली की जरूरतों को पूरा करते हैं, बल्कि इन संसाधनों की आपूर्ति दूसरे राज्यों को भी करते हैं। ऐसे में बिजली मूल्य वृद्धि का कोई ठोस कारण नहीं दिखता, महंगाई के इस दौर आम जनता आर्थिक बोझ से परेषान है।

 

*बिजली हाफ योजना को लगभग बंद करने से दोहरी मार ..*

 

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि, प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा हमारी ‘बिजली हाफ योजना’ को बंद करने से जनता पर आर्थिक बोझ की

 

दोहरी मार पड़ी है। एक तरफ, बिजली की कीमतें बढ़ाई गई हैं, वहीं दूसरी तरफ रियायती योजना को लगभग खत्म कर दिया गया है, जिससे आम नागरिकों और किसानों की मुश्किलें और भी बढ़ गई हैं।

 

*आम उपभोक्ताओं और उद्योगों पर प्रभाव..*

 

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि, बिजली दरों में लगातार हो रही वृद्धि ने घरेलू बजट को बुरी तरह प्रभावित किया है और छोटे व्यवसायों की लागत कई गुना बढ़ गया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई है। इस अप्रत्याशित वृद्धि से आम नागरिकों में भारी असंतोष है, क्योंकि उनकी दैनिक जीवन की लागत लगातार बढ़ती जा रही है।

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि, कृषि प्रधान राज्य होने के नाते, छत्तीसगढ़ के किसान अपनी फसलों की सिंचाई के लिए बड़े पैमाने पर बिजली पर निर्भर हैं। बिजली की बढ़ती कीमतें सीधे तौर पर उनकी उत्पादन लागत में वृद्धि कर रही हैं, कई छोटे और सीमांत किसान अब अपनी फसलों की सिंचाई के लिए बिजली का खर्च वहन नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनकी पैदावार और आजीविका पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यह स्थिति न केवल किसानों की आर्थिक स्थिरता को चुनौती देती है, बल्कि राज्य की खाद्य सुरक्षा को भी खतरे में डालती है।

 

*प्रमुख मांगें..*

 

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि, सरकार बढ़ी हुई बिजली दरों को तुरंत वापस ले। किसानों के लिए कृषि पंपों पर विशेष सब्सिडी या रियायती बिजली दर लागू करे। किसानों के लिए कृषि पंपों पर विशेष सब्सिडी या रियायती बिजली दर लागू करे। राज्य में बिजली उत्पादन और वितरण प्रणाली में सुधार किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी वृद्धि को रोका जा सके।

 

 

 




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